Chanakya Niti Hindi | ऐसी जगह पर एक दिन भी निवास ना करें, जहां यह पांच चीज न हो

Chanakya Niti हिंदी में

Chanakya Niti प्रथम अध्याय श्लोक नौ

ऐसी जगह पर एक दिन भी निवास ना करें जहां यह पांच चीज न हो एक धनवान व्यक्ति, एक ब्राह्मण जो वैदिक शास्त्रों में निपुण हो, एक राजा, एक नदी और एक चिकित्सक।
Chanakya Niti प्रथम अध्याय श्लोक नौ
दोस्तों आचार्य चाणक्य नीति में कहते हैं कि उन स्थानों पर एक दिन भी नहीं रहना चाहिए जिस शहर में कोई भी धनवान व्यक्ति ना हो, जिस देश में वेदों को जानने वाला विद्वान ना हो, जिस देश में कोई राजा या फिर सरकार ना हो, जिस शहर या गांव में कोई वैध यानि कि डॉक्टर ना हो, जिस स्थान के पास कोई भी नदी नहीं बहती हो क्योंकि आचार्य चाणक्य मानते हैं कि जीवन की समस्या में इन पांच वस्तुओं का महत्व बहुत ही है।


जैसे की प्रॉब्लम के समय पर अगर आपको पैसे की जरूरत होती है तो वह धनवान व्यक्ति आपको पैसे दे सकता है भले ही थोड़े उधार देगा मगर वह पैसे दे सकता है क्योंकि उसमें उसका भी फायदा है.
कर्मकांड और जिंदगी को कैसे जीना है एक ब्राह्मण से अच्छा कोई नहीं जान सकता और वह अगर वेदों में निपुण है तो वह आपको अच्छी जिंदगी जीने की सलाह दे सकता है तो कोशिश कीजिए ऐसी जगह पर रहने की जहां एक ब्राह्मण हो, जो वैदिक शास्त्रों में निपुण हो।


देश को चलाने के लिए पहले राजा का शासन चलता था और अब भी सरकार का शासन चलता है इसीलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऐसी जगह पर न रहे जहां पर सरकार यानि लोकतंत्र ना हो।
जिंदगी जीने के लिए पानी बहुत ही जरूरी है यह आप भी जानते हैं और छोटे से छोटा बच्चा भी जानता होगा क्योंकि हर इंसान की जिंदगी में पानी सबसे अहम हिस्सा है मगर पानी एक ऐसी चीज है जो हर जगह पर नहीं मिलेगा और पानी की कमी पूरी करने के लिए कोशिश करनी चाहिए कि आप ऐसी जगह पर है जहां पानी भरपूर आपको मिलता हूं या फिर एक नदी आपके आपके इलाके के आस पास बहती हो।


चाणक्य कहते हैं जहां पर एक चिकित्सक न हो हो वहां पर भी नहीं रहना चाहिए क्योंकि सबसे जरूरी चीज़ है आपकी हेल्थ अगर आपकी हेल्थ बचाने वाला ही नहीं होगा तो वह जगह कोई भी काम की नहीं क्योंकि आपकी हेल्थ अच्छी नहीं रहेगी तो जिंदगी की कोई कीमत नहीं है तो आपको कोशिश करनी चाहिए ऐसी जगह रहने की जहां पर पास में कोई डॉक्टर हमेशा उपलब्ध हो।

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Chanakya Niti Hindi | इंसान को परखना सीखें कौन अच्छा कौन बुरा?

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Chanakya Niti, प्रथम अध्याय श्लोक 11

नौकर की परीक्षा तब करें जब वह कर्तव्य का पालन ना कर रहा हो, रिश्तेदार की परीक्षा तब करें जब आप मुसीबत में घिरे हो, मित्र की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में करें और जब आपका वक्त अच्छा ना चल रहा हो तब पत्नी की परीक्षा करें.


दोस्तों, आचार्य चाणक्य इस नीति में कहना चाहते हैं कि समय पर ही लोगों की परख होती है। हम सब जानते हैं कि हर एक इंसान के अंदर अच्छाई होती है और बुराई भी होती है तो हर एक इंसान हमारे समय को देखने के बाद अपना सही चेहरा दिखाता है यानी कि हमारे लिए वह इंसान कैसा है वह हमारे अच्छे या फिर बुरे टाइम पर निर्भर करता है.
Chanakya Niti Hindi
इसीलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि नौकर की परीक्षा तब करें जब वह कर्तव्य का पालन न कर रहा हो, अगर किसी भी रिश्तेदार की परीक्षा करनी है कि वह हमारे लिए कैसा है हमारे लिए अच्छा सोचता है या फिर हमारे लिए बुरा सोचता है तो वह परीक्षा आप जब भी मुसीबत में हो मुसीबत में हो तब आप ले सकते हैं, आपका कोई भी रिश्तेदार आपके लिए शुभचिंतक है आपके लिए अच्छा सोचता है तो आप की मुसीबत के समय में भी आपके लिए काम आएगा.


एक सच्चे दोस्त की भी परीक्षा उसी समय पर होती है जब आप बहुत ही बुरी परिस्थिति में हो, जब आपके पास पैसा ना हो या फिर आपके घर में कोई प्रॉब्लम हो तो आपका एक सच्चा मित्र ही आपके काम आ सकता है. अगर आपका कोई दोस्त है जो आपको बुरे समय में काम नहीं आया तो वह मित्र कोई भी काम का नहीं क्योंकि वह आपके बुरे समय में आपके साथ नहीं रहा तो वह आपके लिए कुछ भी नहीं कर पाएगा.
चाणक्य यह भी कहते हैं कि पत्नी की परीक्षा बुरे वक्त में ही हो सकती हैं, पत्नी ऐसी होनी चाहिए जो आपको व्यसन से दूर करें, पत्नी वह होती है जो सहायिका और असली जीवन संगिनी होती है. पत्नी के मन में कभी भी पैसों की लालच नहीं होनी चाहिए यानी कि पति का कैसा भी समय चल रहा हो उसके पास पैसे हो या ना हो लेकिन पत्नी को उसका साथ देना चाहिए.


आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सही समय पर सही इंसान की परख हो जाती है बस आपको सही नजर से उसको देखना है कि किस समय पर कौन सा व्यक्ति आपको काम आया.

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