सात अजूबे – Hindi Short Story With Moral

सात अजूबे – Hindi Short Story With Moral

रिचा 9 साल की एक छोटी लड़की थी जो गाँव में रहती थी। उसने Class 4th तक की पढ़ाई अपने ही गाँव के स्कूल से की और Class 5th से उसे गाँव के पास शहर में एक अच्छे स्कूल में दाखिला मिल गया। वह बहुत खुश थी की उसे शहर के प्रमुख स्कूल में दाखिला मिला है। आज शहर के स्कूल में उसका पहला दिन था और स्कूल जाने के लिए वो स्कूल बस का इंतजार कर रही थी। जब बस आयी वो तुरंत बस में चढ़ गयी वो बहुत ही उत्साहित नजर आ रही थी।

जब बस स्कूल पहुंची सभी बच्चे अपनी-अपनी क्लास में जाने लगे रिचा ने भी अपनी क्लास का पता साथ के बच्चों से पूछा और अपनी क्लास में चली गई जब वह अपनी क्लास में पहुंची उसकी क्लास के बच्चे उसका मजाक उड़ाने लगे उसके कपड़ो को देखकर और यह जानकर कि वह गांव से है जल्द ही टीचर क्लास में आ गई और उसने सभी बच्चों से शांत रहने के लिए कहा उसने रिचा को सभी से Introduce कराया और बताया कि आज से रिचा भी आप लोगों के साथ ही पढ़ेगी। 


उसके बाद टीचर ने सभी बच्चों से Surprise टेस्ट के लिए तैयार रहने को कहा और टीचर ने सभी से दुनिया के 7 अजूबे लिखने को कहा जल्द ही सभी बच्चे अपनी-अपनी कॉपियों में Answer लिखने लगे रिचा ने भी कुछ देर सोचकर धीरे-धीरे Answer देना शुरू किया। 
रिचा को छोड़कर बाकी सभी बच्चे अपना-अपना Answer Paper टीचर को Submit करा चुके थे, टीचर रिचा के पास आयी और पूछा “What Happended Dear” कोई बात नहीं तुम्हें जितना आता है उतना ही लिख दो क्योंकि बाकी के बच्चों को कुछ दिन पहले मैं इसके बारे में बता चुकी हूं लेकिन तुम्हें नहीं। 
रिचा ने जवाब दिया मैं सोच रही हूं कितने सारे अजूबे हैं मैं किन सात अजूबों को लिखूं और ऐसा कहते हुए उसने अपना Answer Paper टीचर को सबमिट कर दिया टीचर ने एक-एक करके सब के Answer Paper को देखना शुरू किया और लगभग सभी ने सही जवाब लिखे थे जैसे – चीन की दीवार, ताजमहल, हैंगिंग गार्डन आदि। 


टीचर खुश थी कि सभी बच्चों को सही Answer पता हैं और आखरी में उसने रिचा का आंसर पेपर पढ़ना शुरू किया। 
“सात अजूबे हैं – देख पाना, सुन पाना, महसूस करना, हंसना, सोचना, प्यार करना और दयालु रहना। “
टीचर हैरान थी और पूरी क्लास में शांति थी आज एक छोटे गांव की लड़की ने भगवान द्वारा हमें दिए गए अनमोल उपहारों की याद दिला दी थी और यह सचमुच एक अजूबे जैसा ही था। 
शिक्षा – भगवान ने हमें वह सब शक्तियां दी हैं जिससे हम अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं जरूरत है तो बस अपने अंदर झांकने की, भगवान द्वारा हमें दिए गए अजूबों को पहचानने की। 


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हाथी और ज़ंजीर – Hindi Short Story With Moral

हाथी और ज़ंजीर – Hindi Short Story With Moral

Hindi Short Story With Moral
Hello दोस्तों कैसे है आप सब आज मै आपके साथ शेयर करने जा रहा हु अपने Facebook मित्र द्वारा भेजी गयी एक कहानी जो की बहुत ही प्रेरणादायक है। 
एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!
ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे। 


उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ?
तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”
आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!


शिक्षा – 
इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े-जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं। इन काल्पनिक जंजीरों को तोड़ दीजिये और फिर से कोशिश कीजिये आज नही तो कल आपको सफलता जरूर मिलेगी।

अगर आपके पास भी ऐसी ही कोई शिक्षाप्रद कहानी है तो आप Facebook में संपर्क कर हमे वो कहानी भेज सकते है हम अपने ब्लॉग पर सभी के साथ उस शिक्षाप्रद कहानी को साझा करेंगे।

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छोटे मेढ़क और बड़ा टावर – Hindi Short Story With Moral

छोटे मेढ़क और बड़ा टावर – Hindi Short Story With Moral

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जब आप नकारात्मक छोड़ सकारात्मक सोचना शुरू करते है तब आपको सकारात्मक परिणाम मिलना शुरू हो जाता है – Willie Nelson

एक बार बहुत से मेढको की एक Race (दौड़) आयोजित की गयी। Race में सभी मेढको को एक बड़े Tower में चढना था और जो मेढ़क सबसे पहले ये काम करता उसे विजेता घोषित होना था। मेढकों की दौड़ देखने के लिए टावर के आस-पास बहुत भीड़ जमा थी जो Race देखने और मेढकों को प्रोत्साहित करने पहुचे थे। 


Race शुरू हुई, वास्तव में भीड़ में से कोई भी ये विश्वास नही कर रह था की कोई भी मेढ़क इतने बड़े टावर में Top पर चढ़ कर Race पूरा कर पाएगा इसलिए वो चिल्लाने लगे “ओह्ह बहुत ही मुश्किल है कोई भी टॉप पर नही चढ़ पाएगा, कोई भी ताकत इन छोटे मेढको को टावर के टॉप में चढने में सफल नही कर सकती टावर बहुत ऊँचा है”
Race के दौरान मेढ़क एक-एक करके टावर से निचे गिर रहे थे और भीड़ के इस तरह चिल्लाने के बाद वो और कमजोर पड़ गये और तेज़ी से टावर से निचे गिरने लगे लेकिन सब मेढ़क में एकमात्र छोटा मेढ़क ऐसा था जो लगातार रफ़्तार के साथ टावर में ऊपर की तरफ बढ़ रहा था। भीड़ चिल्लाते रही “बहुत ही कठिन है कोई भी नही चढ़ पाएगा” और यह सुन कर कुछ और टावर में चढ़ते हुए मेढ़क निचे गिरने लगे। 
लेकिन वो एकमात्र मेढ़क बस चलता रहा, चलता रहा, चलता रहा और उसने हार नही मानी। 
अंत में सभी मेढ़क टावर से गिर गये एकमात्र उस मेढ़क को छोड़ कर जो रफ़्तार के साथ टावर पर चढ़ रहा था और अंत में वही छोटा मेढ़क टावर के Top पर पहुच गया और Race जीत गया। 


सभी दूसरे मेढ़क जानना चाहते थे की इस मेढ़क में ऐसा क्या था जो इसे हमसे अलग करता है हम भी इसके जैसे ही है लेकिन हम क्यों उस टावर में नही चढ़ पाए?
इसलिए एक मेढ़क ने विजेता मेढ़क से जाकर ये पूछना चाहा की उसने ऐसा कैसे किया और उस मेढ़क के पास जाकर उसे पता चला वह विजेता मेढ़क बहरा (Deaf) था। 
शिक्षा –
उन Negative बातों को, Negative लोगो को कभी मत सुनो जो आपके काम में बाधा डालते है और बोलते है की आप ये नही कर सकते। ये आपका सपना है इसे आपको खुद पूरा करना है बोलने वाले बोलते रहेंगे हमे उन्हें नही सुनना। 
हमेशा याद रखें जो हम देखतें है जो हम सुनते है उसका हमारे जीवन पर कहीं ना कहीं असर जरूर पड़ता है इसलिए हमेशा Positive बातें सुने जो आपको आपके सपनो की और अग्रसर करे। 


उन लोगो का साथ छोड़ दें जो आपके सपनों को पूरा करने में बाधा डालते है और जिन लोगो का साथ आप नही छोड़ सकते उनके लिए बहरे (Deaf) बन जाइये बिल्कुल उस मेढ़क की तरह जिसपर किसी की बातों का कोई असर नही पड़ता और सिर्फ अपना लक्ष्य नजर आता है। 
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  1. नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ….. Thank you so much!! 🙂 🙂

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डॉक्‍टर की समझदारी – Hindi Short Story With Moral

डॉक्‍टर की समझदारी – Hindi Short Story With Moral

Hello दोस्तों कैसे है आप सब आज मै आपके साथ शेयर करने जा रहा हु अपने Facebook मित्र द्वारा भेजी गयी एक कहानी जो एक बहुत ही अच्छा सन्देश देती है।

तो आइये जानते है क्या है वो कहानी और क्या है वो सन्देश – 



एक स्त्री एक दिन एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पास के गई और बोली, ” डाक्टर मैँ एक गंभीर समस्या मेँ हुँ और मै आपकी मदद चाहती हुँ । मैं गर्भवती हूँ, आप किसी को बताइयेगा नही मैने एक जान – पहचान के सोनोग्राफी लैब से यह जान लिया है कि मेरे गर्भ में एक बच्ची है। मै पहले से एक बेटी की माँ हूँ और मैं किसी भी दशा मे दो बेटियाँ नहीं चाहती । “

डॉक्‍टर की समझदारी - Hindi Short Story With Moral

डाक्टर ने कहा ,”ठीक है, तो मै आपकी क्या सहायता कर सकता हुँ ?” तो वो स्त्री बोली,” मैँ यह चाहती हू कि इस गर्भ को गिराने मेँ मेरी मदद करें ।”

डाक्टर अनुभवी और समझदार था। थोडा सोचा और फिर बोला,”मुझे लगता है कि मेरे पास एक और सरल रास्ता है जो आपकी मुश्किल को हल कर देगा।” वो स्त्री बहुत खुश हुई, डाक्टर आगे बोला, ” हम एक काम करते है आप दो बेटियां नही चाहती ना ??? तो पहली बेटी को मार देते है जिससे आप इस अजन्मी बच्ची को जन्म दे सके और आपकी समस्या का हल भी हो जाएगा. वैसे भी हमको एक बच्ची को मारना है तो पहले वाली को ही मार देते है ना?”


तो वो स्त्री तुरंत बोली “ना ना डाक्टर.”!!! हत्या करना गुनाह है पाप है और वैसे भी मैं अपनी बेटी को बहुत चाहती हूँ । उसको खरोंच भी आती है तो दर्द का अहसास मुझे होता है डाक्टर तुरंत बोला,”पहले कि हत्या करो या अभी की जो जन्मा नही उसकी हत्या करो दोनो ही पाप हैं।” यह बात उस स्त्री को समझ आ गई । वह स्वयं की सोच पर लज्जित हुई और पश्चाताप करते हुए घर चली गई ।

क्या आपको समझ मेँ आयी? अगर आई हो तो शेयर करके दुसरे लोगो को भी समझाने मे मदद कीजिये ….बडी कृपा होगी । हो सकता है आपका एक शेयर किसी की सोच बदल दे, Save Girl,Save world


अगर आपके पास भी ऐसी ही कोई शिक्षाप्रद कहानी है तो आप Facebook में संपर्क कर हमे वो कहानी भेज सकते है हम अपने ब्लॉग पर सभी के साथ उस शिक्षाप्रद कहानी को साझा करेंगे।

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आम का पेड़ – Hindi Short Story With Moral

आम का पेड़ – Hindi Short Story With Moral

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एक बार की बात है आम का एक बहुत बड़ा पेड़ था। एक छोटा बच्चा रोजाना उस पेड़ के पास आता था और उस पेड़ के साथ खेलता था और उसे उस आम के पेड़ के साथ खेलना अच्छा लगता था। वह पेड़ में चढ़ता था, उसके फल खाता था और उसकी छाँव लेता था। इस तरह वो बच्चा पेड़ से प्यार करता था और वो पेड़ उस बच्चे से, समय गुजरता रहा और और वो बच्चा बड़ा होने लगा और अब वो उस आम के पेड़ के पास खेलने भी नही जाता था।

एक दिन वो बच्चा काफी समय बाद उस पेड़ के पास आया वो दुखी लग रहा था। आम के पेड़ ने उसे देखा और बोला “आओ खेलो मेरे साथ” यह सुनकर उस लड़के ने जवाब दिया “अब मै बच्चा नही हु और पेडों के साथ नही खेलता अब मुझे खिलौने चहिये और मुझे खिलौने खरीदने के लिए पैसे चहिये” पेड़ ने कहा “माफ़ करना मेरा पास पैसे तो नही है लेकिन तुम मेरे सारे आम ले सकते हो जिन्हें बेच के तुम्हारे पास पैसे आ जाएंगे” वह लड़का बहुत उत्साहित हो गया पेड़ से सारे आम तोड़े और खुसी खुसी चला गया।

उसके बाद फिर से वह लड़का काफी लंबे समय तक उस पेड़ के पास नही आया, जब आया तब वो काफी बड़ा हो चूका था पेड़ उसे देख कर बहुत खुस हुआ और बोला “आओ खेलो मेरे साथ” तब उस आदमी ने बोला “मेरे पास खेलने का समय नही है , मुझे अपने परिवार के लिए काम करना है उनके रहने के लिए आश्रय बनाना है क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो ?” पेड़ ने कहा “मेरे पास घर तो नही है जो मै तुम्हे दे सकु लेकिन तुम मेरी शाखाएं काट कर उनको अपना घर बनाने के लिए प्रयोग कर सकते हो” इसलिए उस आदमी से उस पेड़ की सारी शाखाएँ काट ली और खुसी-खुसी वँहा से चला गया लेकिन उसके बाद वह आदमी बहुत लंबे समय तक उस पेड़ के पास नही आया। पेड़ अकेला था और दुखी था।

एक दिन बहुत गर्मी थी वो आदमी फिर से उस पेड़ के पास पंहुचा, हमेशा की तरह इस बार भी पेड़ उसे देख कर बहुत खुस हो गया और कहने लगा “आओ खेलो मेरे साथ” तब उस आदमी ने बोला “मै बहुत दुखी हु और बूढा हो रहा हु इसलिए मै एक बार नौकायान के लिए जाना चाहता हू क्या तुम मुझे नाव दिला सकते हो?” पेड़ बोला “मेरी Trunk (तना) से तुम नाव बना सकते हो और नौकायान के लिए जा सकते हो” इसलिए उस आदमी ने नाव बनाने के लिए पेड़ के Trunk काट दिए और नौकायान के लिए चला गया और लंबे समय तक वापिस नही आया।

काफी वर्षो बाद वो व्यक्ति फिर से उस पेड़ के पास आया तब पेड़ बोला “माफ़ करना मेरे बच्चे लेकिन मेरे पास अब तुम्हे देने को कुछ भी नही है, आम भी नही, Trunk(तना) भी नही, शाखाएं भी नही, अब मेरे पास बस मेरी सूखी जड़ें बची है” यह सुनकर वह आदमी बोला “अब मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिये, बस आराम करने के लिए एक शांत जगह चाहिये, मै बहुत थक चूका हु” पेड़ बोला “आओ बुढा पेड़ आराम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है, आओ और मेरे साथ आराम करो” वो आदमी आराम करने के लिए उस पेड़ के निचे बैठ गया और आज वो बुढा आम का पेड़ उस आदमी को अपने पास पाकर बहुत खुस था।

शिक्षा – इस कहानी में आम का पेड़ हमारे माता-पिता का प्रतीक है। जब हम छोटे होते है हमे उनके साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है। जब हम बड़े होने लगते है हम उन्हें छोड़ देते है और केवल तभी उनके पास जाते है जब हमे उनकी जरूरत होती है। माता-पिता हमारे लिए अपने जीवन तक का बलिदान कर देते है, उनके बलिदानों को कभी मत भूलना। इससे पहले की बहुत देर हो जाये उनको प्यार करो उनकी देखभाल करो ।

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गुस्से में हम चिल्लाते क्यों हैं? – Hindi Short Story With Moral

गुस्से में हम चिल्लाते क्यों हैं? – Hindi Short Story With Moral

Hindi Short Story With Moral

एक संत महात्मा गंगा नदी के किनारे स्नान के लिए स्थान खोज रहे थे तभी उन्होंने गंगा के तट पर एक परिवार के सदस्यों को खड़े देखा जो गुस्से में एक दुसरे पर चिल्ला रहे थे। ये देखकर उन्होंने अपने साथ चल रहे शिष्यों को देखा और मुस्कुराते हुए पूछने लगे “लोग गुस्से में एक दुसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?”

शिष्यों ने कुछ देर तक सोचा फिर उनमे से एक शिष्य बोला “क्योंकि हम अपनी शांति खो देते है इसलिए हम चिल्लाने लगते हैं” “लेकिन चिल्लाना क्यों है जब दूसरा व्यक्ति बिलकुल तुम्हारे सामने है, तुम वही बात शांति से भी तो बोल सकते हो?” संत ने फिर से पूछा। 


शिष्यों ने अन्य भी कई जवाब दिए लेकिन दुसरे शिष्य उन जवाबों से संतुष्ट नही हुए।
अंत में संत ने जवाब दिया – “जब दो लोग एक दुसरे से गुस्सा होते है उनके दिल(Heart) एक दुसरे से बहुत दूर हो जाते है। इस दूरी को पूरा करने के लिए उन्हें एक दुसरे से चिल्ला कर बोलना पड़ता है ताकि उनकी बात एक दुसरे तक पहुच सके”
“जितना ज्यादा वो गुस्सा करेंगे उतना ज्यादा वो चिल्लाएँगे क्योंकि उनके दिलों की दुरी उतनी ज्यादा बढती जाएगी”
क्या होता है जब दो लोगो के बीच प्यार होता है? वो एक दुसरे पर चिल्लाते नही है बल्कि शांति से और प्यार से एक दुसरे से बात करते हैं। उनके बीच दूरी होती ही नही या बहुत कम होती है। संत बोले “जब उनके बीच प्यार और ज्यादा बढ़ जाता है फिर क्या होता है?” वो एक दुसरे से बोलते नही है बस कानाफूसी करते है और उनका प्यार उन्हें एक दुसरे के और करीब ले आता है। 
अंत में उन्हें कानाफूसी की भी आवश्यकता नही पड़ती वे बस एक दुसरे की तरफ देखते है और एक दुसरे की बाते समझ जाते है। इसी को दिल मिलना कहते है यानी दिलों के बीच कोई दूरी ना रह जाना। 
संत महात्मा ने अपने शिष्यों की और देखा और बोले “जब भी तुम्हारी किसी से बहस हो अपने दिलों के बीच दूरी मत बढ़ने दो, ऐसे शब्द मत बोलो जिससे तुम्हारे बीच दूरी बढे अन्यथा एक दिन ऐसा आएगा जब दिलों के बीच की दूरी इतनी बढ़ जाएगी की वापसी की राह नामुनकिन हो जाएगी।


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  1. जब हमें गुस्‍सा आता है, तब हमारा ब्‍लड प्रेशर बढ़ जाता है और हम हाइपर होकर गुस्‍से से चिल्‍लाने लगते हैं। गुस्‍सा करने से हम सभी को बचना चाहिए। खासकर अकारण आने वाले गुस्‍से से। यदि गुस्‍सा आ रहा हो तो बागवानी या पेड़ पौधों की देखभाल में जुटने से मन शांत हो जाता है।

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  2. गुस्सा ये साबित करता है कि हम अन्दर से कमज़ोर हैं।
    गुस्से पे सुन्दर आर्टिकल लिखा है आपने

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