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हाथी और ज़ंजीर – Hindi Short Story With Moral
हाथी और ज़ंजीर – Hindi Short Story With Moral
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छोटे मेढ़क और बड़ा टावर – Hindi Short Story With Moral
छोटे मेढ़क और बड़ा टावर – Hindi Short Story With Moral
जब आप नकारात्मक छोड़ सकारात्मक सोचना शुरू करते है तब आपको सकारात्मक परिणाम मिलना शुरू हो जाता है – Willie Nelson
#inspirational story in hindi
8 thoughts on “छोटे मेढ़क और बड़ा टावर – Hindi Short Story With Moral”
Interesting story hai.. thank you
very nice story…..thanks…..
धन्यवाद अमूल जी
धन्यवाद प्रमोद जी
नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ….. Thank you so much!! 🙂 🙂
आपको भी नए वर्ष की बहुत-बहुत बधाईयां
Ekdm sahi likha hai. I like it
waah bahut acchi kahani likhi hai amit ji
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डॉक्टर की समझदारी – Hindi Short Story With Moral
डॉक्टर की समझदारी – Hindi Short Story With Moral
Hello दोस्तों कैसे है आप सब आज मै आपके साथ शेयर करने जा रहा हु अपने Facebook मित्र द्वारा भेजी गयी एक कहानी जो एक बहुत ही अच्छा सन्देश देती है।
तो आइये जानते है क्या है वो कहानी और क्या है वो सन्देश –
एक स्त्री एक दिन एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पास के गई और बोली, ” डाक्टर मैँ एक गंभीर समस्या मेँ हुँ और मै आपकी मदद चाहती हुँ । मैं गर्भवती हूँ, आप किसी को बताइयेगा नही मैने एक जान – पहचान के सोनोग्राफी लैब से यह जान लिया है कि मेरे गर्भ में एक बच्ची है। मै पहले से एक बेटी की माँ हूँ और मैं किसी भी दशा मे दो बेटियाँ नहीं चाहती । “
डाक्टर ने कहा ,”ठीक है, तो मै आपकी क्या सहायता कर सकता हुँ ?” तो वो स्त्री बोली,” मैँ यह चाहती हू कि इस गर्भ को गिराने मेँ मेरी मदद करें ।”
डाक्टर अनुभवी और समझदार था। थोडा सोचा और फिर बोला,”मुझे लगता है कि मेरे पास एक और सरल रास्ता है जो आपकी मुश्किल को हल कर देगा।” वो स्त्री बहुत खुश हुई, डाक्टर आगे बोला, ” हम एक काम करते है आप दो बेटियां नही चाहती ना ??? तो पहली बेटी को मार देते है जिससे आप इस अजन्मी बच्ची को जन्म दे सके और आपकी समस्या का हल भी हो जाएगा. वैसे भी हमको एक बच्ची को मारना है तो पहले वाली को ही मार देते है ना?”
तो वो स्त्री तुरंत बोली “ना ना डाक्टर.”!!! हत्या करना गुनाह है पाप है और वैसे भी मैं अपनी बेटी को बहुत चाहती हूँ । उसको खरोंच भी आती है तो दर्द का अहसास मुझे होता है डाक्टर तुरंत बोला,”पहले कि हत्या करो या अभी की जो जन्मा नही उसकी हत्या करो दोनो ही पाप हैं।” यह बात उस स्त्री को समझ आ गई । वह स्वयं की सोच पर लज्जित हुई और पश्चाताप करते हुए घर चली गई ।
क्या आपको समझ मेँ आयी? अगर आई हो तो शेयर करके दुसरे लोगो को भी समझाने मे मदद कीजिये ….बडी कृपा होगी । हो सकता है आपका एक शेयर किसी की सोच बदल दे, Save Girl,Save world
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#hindi short story with moral
#hindi kahani
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2 thoughts on “डॉक्टर की समझदारी – Hindi Short Story With Moral”
so heart touching story. hats off to such doctors. will definitely share this post on social media and also others should do same sharing more and more . to change the thinking of this educated world. save girl child save life.
DESI INDIAN TADKAबहुत अच्छे मेरे दोस्त…
बेहतरीन सोच…
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आम का पेड़ – Hindi Short Story With Moral
आम का पेड़ – Hindi Short Story With Moral
एक बार की बात है आम का एक बहुत बड़ा पेड़ था। एक छोटा बच्चा रोजाना उस पेड़ के पास आता था और उस पेड़ के साथ खेलता था और उसे उस आम के पेड़ के साथ खेलना अच्छा लगता था। वह पेड़ में चढ़ता था, उसके फल खाता था और उसकी छाँव लेता था। इस तरह वो बच्चा पेड़ से प्यार करता था और वो पेड़ उस बच्चे से, समय गुजरता रहा और और वो बच्चा बड़ा होने लगा और अब वो उस आम के पेड़ के पास खेलने भी नही जाता था।
एक दिन वो बच्चा काफी समय बाद उस पेड़ के पास आया वो दुखी लग रहा था। आम के पेड़ ने उसे देखा और बोला “आओ खेलो मेरे साथ” यह सुनकर उस लड़के ने जवाब दिया “अब मै बच्चा नही हु और पेडों के साथ नही खेलता अब मुझे खिलौने चहिये और मुझे खिलौने खरीदने के लिए पैसे चहिये” पेड़ ने कहा “माफ़ करना मेरा पास पैसे तो नही है लेकिन तुम मेरे सारे आम ले सकते हो जिन्हें बेच के तुम्हारे पास पैसे आ जाएंगे” वह लड़का बहुत उत्साहित हो गया पेड़ से सारे आम तोड़े और खुसी खुसी चला गया।
उसके बाद फिर से वह लड़का काफी लंबे समय तक उस पेड़ के पास नही आया, जब आया तब वो काफी बड़ा हो चूका था पेड़ उसे देख कर बहुत खुस हुआ और बोला “आओ खेलो मेरे साथ” तब उस आदमी ने बोला “मेरे पास खेलने का समय नही है , मुझे अपने परिवार के लिए काम करना है उनके रहने के लिए आश्रय बनाना है क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो ?” पेड़ ने कहा “मेरे पास घर तो नही है जो मै तुम्हे दे सकु लेकिन तुम मेरी शाखाएं काट कर उनको अपना घर बनाने के लिए प्रयोग कर सकते हो” इसलिए उस आदमी से उस पेड़ की सारी शाखाएँ काट ली और खुसी-खुसी वँहा से चला गया लेकिन उसके बाद वह आदमी बहुत लंबे समय तक उस पेड़ के पास नही आया। पेड़ अकेला था और दुखी था।
एक दिन बहुत गर्मी थी वो आदमी फिर से उस पेड़ के पास पंहुचा, हमेशा की तरह इस बार भी पेड़ उसे देख कर बहुत खुस हो गया और कहने लगा “आओ खेलो मेरे साथ” तब उस आदमी ने बोला “मै बहुत दुखी हु और बूढा हो रहा हु इसलिए मै एक बार नौकायान के लिए जाना चाहता हू क्या तुम मुझे नाव दिला सकते हो?” पेड़ बोला “मेरी Trunk (तना) से तुम नाव बना सकते हो और नौकायान के लिए जा सकते हो” इसलिए उस आदमी ने नाव बनाने के लिए पेड़ के Trunk काट दिए और नौकायान के लिए चला गया और लंबे समय तक वापिस नही आया।
काफी वर्षो बाद वो व्यक्ति फिर से उस पेड़ के पास आया तब पेड़ बोला “माफ़ करना मेरे बच्चे लेकिन मेरे पास अब तुम्हे देने को कुछ भी नही है, आम भी नही, Trunk(तना) भी नही, शाखाएं भी नही, अब मेरे पास बस मेरी सूखी जड़ें बची है” यह सुनकर वह आदमी बोला “अब मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिये, बस आराम करने के लिए एक शांत जगह चाहिये, मै बहुत थक चूका हु” पेड़ बोला “आओ बुढा पेड़ आराम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है, आओ और मेरे साथ आराम करो” वो आदमी आराम करने के लिए उस पेड़ के निचे बैठ गया और आज वो बुढा आम का पेड़ उस आदमी को अपने पास पाकर बहुत खुस था।
शिक्षा – इस कहानी में आम का पेड़ हमारे माता-पिता का प्रतीक है। जब हम छोटे होते है हमे उनके साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है। जब हम बड़े होने लगते है हम उन्हें छोड़ देते है और केवल तभी उनके पास जाते है जब हमे उनकी जरूरत होती है। माता-पिता हमारे लिए अपने जीवन तक का बलिदान कर देते है, उनके बलिदानों को कभी मत भूलना। इससे पहले की बहुत देर हो जाये उनको प्यार करो उनकी देखभाल करो ।
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4 thoughts on “आम का पेड़ – Hindi Short Story With Moral”
I like your blog.Stories are very interesting.
Thanks Jhon , Keep visiting
very nice motivational stories
nice story
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गुस्से में हम चिल्लाते क्यों हैं? – Hindi Short Story With Moral
गुस्से में हम चिल्लाते क्यों हैं? – Hindi Short Story With Moral
एक संत महात्मा गंगा नदी के किनारे स्नान के लिए स्थान खोज रहे थे तभी उन्होंने गंगा के तट पर एक परिवार के सदस्यों को खड़े देखा जो गुस्से में एक दुसरे पर चिल्ला रहे थे। ये देखकर उन्होंने अपने साथ चल रहे शिष्यों को देखा और मुस्कुराते हुए पूछने लगे “लोग गुस्से में एक दुसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?”
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जब हमें गुस्सा आता है, तब हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हम हाइपर होकर गुस्से से चिल्लाने लगते हैं। गुस्सा करने से हम सभी को बचना चाहिए। खासकर अकारण आने वाले गुस्से से। यदि गुस्सा आ रहा हो तो बागवानी या पेड़ पौधों की देखभाल में जुटने से मन शांत हो जाता है।
गुस्सा ये साबित करता है कि हम अन्दर से कमज़ोर हैं।
गुस्से पे सुन्दर आर्टिकल लिखा है आपने






Bahut mahsoor kahani… share karne ke liye thanks
Bhut he accha article..
As usual amazing article …. really fantastic …. Thanks for sharing this!! 🙂 🙂