खाने के बाद भूल कर भी यह छह काम कभी नहीं करने चाहिए

अक्सर लोग खाना खाने के बाद या तो लेट जाते हैं या फिर सुस्ताने के लिए बैठ जाते हैं लेकिन यह एक बहुत बड़ी गलती है और एक रिपोर्ट के अनुसार यह आदत आपकी सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छी नहीं है, आज मैं आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहा हूं जो खाने के बाद आपको कभी नहीं करनी चाहिए.

नंबर एक – स्मोकिंग

स्मोकिंग

सिगरेट वैसे तो पीनी नहीं चाहिए फिर भी अगर आपको लगता है और आप छोड़ नहीं सकते तो कभी भी खाने के बाद सिगरेट ना पिए खाने के बाद एक सिगरेट पीना उतना नुक्सान करता है जितना कि एक साथ 10 सिगरेट पीने से आपके शरीर को नुकसान होता है, आप को कम से कम एक घंटे रुकना चाहिए.

सिगरेट में निकोटिन होता है जो आपके शरीर में ऑक्सीजन को कम कर देता है और खाने के बाद आपके शरीर को खाने को पचाने के लिए ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है बहुत सारे एक्सपेरिमेंट्स के बाद यह कहा गया है कि जो लोग खाने के बाद रेगुलर सिगरेट पीते हैं उन्हें कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.

नंबर दो –
बहुत सारे लोगों को खाने के बाद लेटने की आदत होती है कभी भी खाने के तुरंत बाद लेटना या सोना नहीं चाहिए यह आपके लिए अच्छा नहीं है जब आप लेटते हैं तो आपके शरीर के कुछ डाइजेस्टिव अम्ल जो आपके खाने को पचाने का काम करते हैं वह गुरुत्व बल की वजह से असंतुलित हो जाते हैं और इसकी वजह से आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम होती है.

नंबर तीन –
खाने के तुरंत बाद नहाने ना जाए अगर कभी भी खाने के बाद आपको नहाना हो तो 30 मिनट तक इंतजार करें खाने को पचाने के लिए हमारे शरीर को ज्यादा उर्जा और ब्लड की जरूरत होती है लेकिन जब आप नहाते हैं तो पानी की वजह से आपका शरीर ठंडा पड़ जाता है जो आपके खाने को पचाने में दिक्कत करता है.

नंबर चार –
कभी भी खाने के बाद चाय नहीं पीनी चाहिए, खाने के बाद चाय पीने से आपका शरीर खाने से निकले हुए आयरन को अवशोषित नहीं कर पता, चाय में टैनिक एसिड होता है जो कि खाने में से प्रोटीन और आयरन को आपके शरीर में घुलने नहीं देता और इसकी वजह से आपको एनीमिया की बीमारी हो सकती है जो आपके में लाल रक्त कणिकाओं की कमी से होता है.

नंबर पांच –
हरी सब्जियां या फल खाने से पहले खांए न कि खाने से बाद, बहुत कम लोगों को यह बात पता होगी पर यह सच है कि फल या हरी सब्जियां खाना खाने के बाद खाने से आपको कोई फायदा नहीं होता। फल सिर्फ 20 मिनट का टाइम देते हैं आपके पेट से पचने में और जब आप इसे अपने खाने के बाद खाते हैं तो यह खाने के बीच फंस जाता है और इसे आपकी इंटेस्टाइन में पहुंचने में ज्यादा टाइम लगता है और इसकी वजह से वह बर्बाद जाता है उसका कोई फायदा नहीं होता।

नंबर सिक्स –
ठंडे पानी को अवॉइड करें, बहुत ही साधारण सा कारण है कि ठंडा पानी आपके खाने को पचाने में मुश्किलें पैदा करता है जिनको पाचन की समस्या है वह खाने के बाद उबला हुआ पानी पीना शुरू कर सकते हैं उबला हुआ पानी आपके खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है.

तो दोस्तों यह थी आज की पोस्ट मुझे उम्मीद है यह जानकारी आपके जरूर काम आएंगी।

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काश मैंने यह ना किया होता

काश मैंने यह ना किया होता, काश मैंने वह ना कहा होता, काश में ऐसी दिखती, काश मैं यह कर पाता, काश, काश काश…

हम अक्सर इस काश के चक्कर में रह जाते हैं और हमारा आज रेत की तरह हमारे हाथों से फिसलता जाता है हमारी जिंदगी का एक-एक पल धीरे-धीरे हमारे हाथों से निकलता जाता है और हम काश के उस जाल में फंसे रह जाते हैं फिर एक दिन आता है वह लम्हा जब हम अपनी बीती हुई जिंदगी को याद करके कहते हैं काश मैंने अपनी जिंदगी जी होती, काश मैंने भी थोड़ी खुशियां बटोरी होती, काश मैंने हंसी बिखेरी होती, काश मैंने अपने सपने, अपनी चाहतें पूरी की होती, काश मेरी जिंदगी यूं ही ख़त्म ना होती

जिंदगी की रेस में भागते हुए हम अक्सर अपने अपनों को भूल जाते हैं अक्सर हम पैसा, पावर और न जाने क्या-क्या पाने की चाहत में अपनी जिंदगी को जीना ही भूल जाते हैं. दो पल ठहर के इसकी खूबसूरती को देखना भूल जाते हैं पर जब जिंदगी हमें फ्लैश बैक पर लेकर जाती है और हमसे सिर्फ एक सवाल पूछती है कि तुम्हारी नजर में मैं कैसी थी? तब हम अफ़सोस करते हैं उसी काश के मंजर को दोहराते हैं पर कुछ कर नहीं पाते.

दोस्तों जिंदगी भागने का नहीं बल्कि ठहरने का नाम है, काश में नहीं आज में जीने का नाम है तो रूको और सोचो कि जब जिंदगी तुमसे यह सवाल पूछेगी तो क्या तुम मुस्कुरा कर उसे कह पाओगे की जैसी भी थी अच्छी थी, क्या तुम उसे कह पाओगे कि मैंने तुम्हें वैसे जिया जैसे मैं चाहता था? क्या तब उसे बोल पाओगे कि जिंदगी तू बड़ी खूबसूरत थी? अगर नहीं तो भागना छोड़ दो, दुनिया की फिक्र करना छोड़ दो, अभी और इसी पल से अपनी जिंदगी को ऐसे जियो जैसे यह तुम्हारा आखरी पल हो, ऐसे जियो जैसे तुम्हारा कोई काश ना हो क्योंकि कल के इंतजार में अक्सर हम आज को भूल जाते हैं, अपनी लाइफ को भूल जाते हैं.

दोस्तों जिंदगी हर पल जीने का नाम है क्योंकि पता नहीं कब और कहां किस पल मौत बाहें फैलाए तुम्हारा इंतजार कर रही हो, तुम अपने कल को बनाने की होड़ में चले जा रहे हो कभी अपनी लुक्स तो कभी अपने बैंक बैलेंस के लिए मरे जा रहे हो पर अचानक जिंदगी एक टर्न लेती है और सब खत्म हो जाता है फिर चाहे वह बैंक बैलेंस हो या कुछ और रह जाती है तो वह बीती हुई जिंदगी और उसे न जी पाने का अफसोस।

एक महान व्यक्ति ने कहा था जिंदगी तो बस कुछ लोग जीते हैं बाकी लोग तो बस जिंदा रहते हैं आप उन चंद लोगों की तरह बनो जो जिंदगी को जीने में विश्वास रखते हैं उनकी तरह नहीं जो बस जरूरतों और उम्मीदों के बोझ तले जिंदा है क्योंकि जो पल बीत गया वह कभी नहीं आएगा और जो पल बीत रहा है वह भी चला जाएगा तो बस हर पल को यादगार बना लो, अपनी जिंदगी को ऐसे जियो कि कल जब जिंदगी तुमसे पूछे कि मैं तुम्हें कैसी लगी तो तुम मुस्कुरा कर बोल सको खूबसूरत, बहुत खूबसूरत।

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नाग पंचमी का महत्व, जानिए नाग पंचमी क्यों मनायी जाती है

नाग पंचमी का महत्व

सावन महीने में आने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों में एक नाग पंचमी का त्यौहार भी है। सांप अर्थात नाग का हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि उन्हें पाताल लोक या नाग लोक के निवासी भी माना जाता है। ग्रंथों में सापों को एक समुदाय के रूप में माना जाता है. नाग पंचमी के दिन मनसा देवी की भी विशेष रूप से पूजा की जाती है उनका मंदिर बिल्वा पर्वत पर स्थित है, जो दक्षिणी हिमालयी श्रृंखला शिवलिक पर्वत पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि मनसा देवी, भगवान शिव के मन से प्रकट हुईं उन्हें सांप वासुकी की बहन भी कहा जाता है। माना जाता है इस दिन मनसा देवी माता की मन से पूजा करने पर वो अपने भक्तों की सभी उचित इच्छाओं को पूरा करती है।

नाग पंचमी का महत्व

इस दिन नाग को दूध चढ़ाया जाता है और चावल पेश किया जाता है और परिवार को और कुल संरक्षण देने के लिए प्रार्थना की जाती है। पूरे भारत और नेपाल में, नाग पंचमी विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर चतुर्थी पर सांप पूजा की जाती है जिसे नागा चतुर्थी भी कहा जाता है।

वर्ष 2018 में नाग पंचमी कब है?

वर्ष 2018 में नाग पंचमी 15 अगस्त को मनाई जाएगी जिस दिन भारत में स्वतंत्रता दिवस भी है। 

सांपों का हिन्दू धर्म में महत्त्व

प्राचीन काल से ही सांपों को हिंदू धर्म में एक प्रमुख स्थान दिया गया है। कई हिंदू देवताओं को साँपों के साथ दिखाया जाता है जैसे – भगवान विष्णु शेषनाग के आसन पर सोते हैं। भगवान शिव अपने गहने के रूप में सांप पहनते हैं इसके अलावा गणेश भगवन भी सांपों के साथ दिखाए जाते हैं इसलिए ऐसा कहा जा सकता है की हिंदू इतिहास में बहुत लंबे समय से सांपों की पूजा कर रहे हैं।


नाग पंचमी से जुडी कहानियां

इस दिन से कई पौराणिक कथाओं जुडी है जिनके अनुसार, एक घातक सांप कालिया यमुना नदी को जहरीला कर रहा था और ब्रज के निवासियों के लिए पानी पीना मुश्किल हो गया था। कृष्णा जिन्हें भगवान विष्णु के एक अवतार के रूप में माना जाता है, एक दिन नदी में गिरने वाली गेंद के कारण बहस बहाने कलिया के साथ झगड़ा करते है और अंततः उसे पराजित करते है। कालिया हार मान लेता है और नदी से सभी जहर दूर ले जाता है और कृष्ण बदले में उसे आशीर्वाद देते हैं कि पंचमी के इस दिन जो भी सांपों को दूध चढ़ाएगा और प्रार्थना करेगा वो आने वाले समय में सभी कठिनाइयों से दूर रहेगा। इस प्रकार से उस दिन से नागपंचमी दिवस के रूप में मनाया जाता था। 


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रानी पद्मिनी उर्फ़ पद्मावती का इतिहास

यह कहानी है चित्तौड़ की खूबसूरत रानी पद्मावती और उनकी खूबसूरती के पीछे पागल सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की, रानी पद्मावती जिनको पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता है इनका नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है रानी पद्मावती के पिता सिंध प्रांत के राजा थे जो आज के समय में श्रीलंका में पड़ता है उनका नाम गंधर्व सेन था और माता का नाम चंपावती था. रानी पद्मावती बाल्यकाल से ही अत्यंत खूबसूरत और मनमोहन थी महाराज गंधर्व सेन ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर रचाया था जिस में भाग लेने के लिए भारत के अलग-अलग राज्यों से बड़े-बड़े राजा महाराजा आए हुए थे, उसी स्वयंवर में मौजूद थे चित्तौड़ के राजा राजा रवल रतन सिंह, रानी पद्मावती का विवाह स्वयंवर विजेता चित्तौड़ के राजा रवल रतन सिंह के साथ बड़े ही धूमधाम से हुआ।


राजा रतन सिंह एक बहादुर और साहसी योद्धा थे वह एक प्रिय पति होने के साथी ही एक बेहतर शासक भी थे वे चित्तौड़ के राज्यों को बड़े कुशल तरीके से चला रहे थे उनके शासन में वहां की प्रजा हर तरीके से सुखी थी राजा रतन सिंह को कला में भी काफी रुचि थी उनके दरबार में काफी बुद्धिमान लोग थे उनमें से एक प्रसिद्ध संगीतकार राघव चेतन भी मौजूद थे जो रतन सिंह के काफी प्रिय थे ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी की एक राघव चेतन एक जादूगर भी था वह अपनी इस कला का उपयोग शत्रुओं को चकमा देने या अचंभित करने के लिए आपातकालीन समय में इस्तेमाल करता था एक दिन राघव चेतन काला जादू करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया जब राजा को इस बारे में पता चला कि राघव चेतन गुप्त रुप से काला जादू करता है राजा ने उसे राज्य से अपमानित करके निकाल दिया इसके बाद राघव चेतन ने दिल्ली की तरफ जाने की ठानी और वहाँ जाकर वह दिल्ली के पास एक घने जंगल में छिपा रहा जहाँ सुलतान (अलाउद्दीन खिलजी) अक्सर शिकार के लिए आया करता था एक दिन सुलतान शिकार करने पहुचे ही थे तभी राघव चेतन ने बाँसुरी बजाना शुरू कर दिया बाँसुरी की आवाज सुनकर सुल्तान ने बाँसुरी बजाने वाले को ढूढने का आदेश दिया तब राघव चेतन स्वयं उनके सामने आए तभी सुल्तान ने उससे अपने साथ दिल्ली के दरबार में आने का आदेश दिया और दिल्ली जाकर राघव चेतन ने चित्तौड़ राज्य की सैन्य शक्ति, चित्तौड़ की सुरक्षा, वहाँ की संपत्ति और वहाँ के साम्राज्य से जुड़ा एक-एक राज्य खोल दिया यहाँ तक की राघव चेतन ने दिल्ली के सुल्तान को चित्तौड़ के राजा रवल रतन सिंह की धर्मपत्नी रानी पद्मिनी की खूबसूरती के बारे में भी बताया उनकी ख़ूबसूरती के बारे में सुनने के बाद अलाउद्दीन उन्हें मन ही मन चाहने लगा था राघव चेतन की बातें सुनकर अलाउद्दीन खिलजी ने कुछ ही दिनों में चित्तौड़ पर आक्रमण करने का मन बना लिया और अपनी एक विशाल सेना चित्तौड़ के लिए रवाना कर दी।


चित्तौड़ पहुचते ही अलाउद्दीन के हाथ निराशा लगी क्योंकि उन्होंने पाया की चित्तौड़ को चारों तरफ से सुरक्षा प्रदान की गई है लेकिन वो रानी पद्मिनी की सुन्दरता को देखने का और इंतजार नहीं कर सकता था  इसलिए उसने राजा रतन सिंह के लिए यह संदेश भेजा की वह रानी पद्मिनी को बहन मानते हैं और उनसे मिलना चाहते हैं खिलजी के इस अजीब मांग को राजपूत मर्यादा के विरुद्ध बताकर राजा रतन सिंह ने ठुकरा दिया लेकिन निराश रतन सिंह को अपने साम्राज्य को अलाउद्दीन के प्रकोप से बचाने का एक मौका दिखाई दिया रानी पद्मावती सुल्तान को अपनी झलक दिखाने को तैयार तो हो गई लेकिन केवल प्रतिबिम्ब में इसके लिए किले के एक ऊँचे बुर्ज में अलाउद्दीन खिलजी को खड़ा किया गया उसके सामने एक आईना लगा दिया गया वहाँ बुर्ज के एकदम नीचे एक तालाब था जो बुर्ज में लगे आईने में साफ दिखाई देता था तालाब के किनारे रानी पद्मावती खड़ी हो गई रानी पद्मावती का प्रतिबिम्ब तालाब के पानी में पड़ा और तालाब का प्रतिबिम्ब आईने में दिखाई दिया और इस तरह पहली बार सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती के रूप को देखा पद्मावती के रूप के बारे में सुल्तान खिलजी ने जितना सुना था उससे कहीं ज्यादा पाया पद्मावती को देखते ही अलाउद्दीन ने उसे अपना बनाने की ठान ली शर्त के अनुसार चित्तौड़ के महाराजा ने अलाउद्दीन खिलजी को आईने में रानी पद्मावती का प्रतिबिंब दिखा दिया और फिर अलाउद्दीन खिलजी को पूरे मेहमान नवाजी के साथ पुरे चित्तौड़ जिले के 7 दरवाजे पार करा कर उनकी सेना के पास छोड़ने गये इसी अवसर का लाभ उठाकर अलाउद्दीन ने राजा रतन सिंह को बंदी बना लिया और उसके बाद उसने संदेश भिजवाया की राजा रतन सिंह को अगर देखना है तो रानी पद्मावती को तुरंत अलाउद्दीन खिलजी के खिदमत में किले के बहार भेज दिया जाए रजा रतन सिंह को अलाउद्दीन खिलजी की गिरफ्त से शकुशल मुक्त कराने के लिए रानी पद्मावती ने सोनगढ़ के चौहान राजपूत, जनरल गोरा और बादल के साथ मिलकर सुलतान को उसके ही खेल में हराने की ठानी और कहा कि अगली सुबह रानी पद्मावती को उनके यहां भेज दिया जाएगा और फिर 150 पालकी मंगवाई गई और उन्हें किले से अलाउद्दीन के कैंप तक ले जाया गया लेकिन पालकी के अन्दर रानी पद्मावती और उनकी दसियों के भेष में लड़ाके योद्धा मौजूद थे योद्धाओं ने दिल्ली की सेना में आक्रमण कर दिया और इसी चालाकी से राजा रतन सिंह को अलाउद्दीन की गिरफ्त से छुड़ा लिया गया और रतन सिंह को सुरक्षित रूप से महल पंहुचा दिया गया।


कहा जाता है कि वासना और लालच इंसान की बुद्धि हर लेती है अलाउद्दीन खिलजी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. सुल्तानपुर को जब खबर लगी की उसके साथ छल हुआ है तो इस बात को सुनकर सुल्तान आग बबूला हो गया और उसने तुरंत ही चित्तौड़ पर आक्रमण करने का निर्णय लिया रतन सिंह की सेना सुल्तान की सेना से बहुत छोटी थी लेकिन रतन सिंह के पास युद्ध के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था और उन्होंने युद्ध का आदेश दिया और किले का दरवाजा खोलकर युद्ध के लिए तैयार हो गए किले का दरवाजा खुलते ही अलाउद्दीन और उसकी सेना ने आक्रमण कर दिया इस खतरनाक युद्ध में पराक्रमी राजा रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए उनकी सेना भी हार गई और अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के किले को लूट लिया युद्ध में राजा रतन सिंह और अन्य राजपूत योद्धा के मारे जाने की खबर सुनकर रानी पद्मावती ने जौहर करने का निर्णय लिया जौहर एक ऐसी प्रक्रिया है जिस में सारी महिलाएं अपने दुश्मन के साथ रहने की बजाय स्वयं को विशाल अग्निकुंड में न्योछावर कर देती हैं जब अलाउद्दीन खिलजी किले के अन्दर प्रवेश प्रवेश करता है तब उसके हाथ लगती है सिर्फ निराशा, धुआं और राख कहा जाता है आज भी चित्तौड़ की महिलाओं को और रानी पद्मावती के जौहर करने की बात को लोग आज भी गर्व से याद करते हैं कहते हैं राजपूत सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं।

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