Buddha Story in Hindi
एक बार भगवान बुद्ध, एक पेड़ के नीचे चबूतरे पर बैठे हुए थे और वहां बैठकर हर भक्त जो भी भेंट लाता उसको स्वीकार कर रहे थे तभी एक वृद्धा वहां पर आई और अपनी काँपती हुई आवाज में उसने भगवान Buddha से कहा “भगवान मैं बहुत गरीब हूं मेरे पास आपको भेट देने के लिए कुछ भी नहीं है हां लेकिन आज मुझे एक आम मिला है, मैं आधा आम खा चुकी थी तभी पता चला कि आप आज दान ग्रहण करने वाले हैं और मैंने यह सोचा कि जो आधा आम बचा है उसी को आपके चरणो में समर्पित कर दूं और इसीलिए मैं यह आम आपको भेंट देने आई हूं, कृपा करके इसे स्वीकार करें”
गौतम Buddha अपने आसन को छोड़कर उस वृद्धा के आम को अपने पात्र में लेने चले गए, गौतम Buddha ने अपने पात्र में वह आधा आम प्रेम और श्रद्धा से रख दिया मानो कोई बड़ा रत्न मिल गया हो. वह वृद्धा वहां से संतुष्ट भाव से लौट गयी और वृद्धा के चेहरे पर कुछ अलग ही खुशी दिखाई दे रही थी.
वहां उपस्थित जितने बड़े-बड़े राजा थे, जितने बड़े-बड़े लोग थे वह सारी चीजें देखकर एकदम चौक गए हैं. उन लोगों को कुछ समझ नहीं आया. भगवान बुद्ध वृद्धा का खाया आधा आम प्राप्त करने के लिए आसन तक छोड़ चुके थे और नीचे तक आ चुके थे और वह लोग इतने हैरान थे कि भगवान Buddha ने खुद अपने हाथ आगे किए थे और एक राजा से रहा नहीं गया और उसने भगवान बुद्ध से पूछ लिया भगवान इस वृद्धा में और उसकी भेंट में ऐसी क्या विशेषता है जो हमने इतने बड़े-बड़े उपहार दिए उसमें नहीं है.
भगवान Buddha मुस्कुरा कर बोले “राजन् इस वृद्धा ने अपनी संपूर्ण संचित पूंजी मुझे भेंट कर दी जबकि आप लोगों ने अपनी संपूर्ण संपत्ति का केवल एक छोटा सा भाग ही मुझे भेंट किया है” ज्ञान के अहंकार में डूबे जितने भी बड़े-बड़े लोग थे, जितने भी राजा थे उनका सर नीचे झुक गया.
Buddha बोले कि वृद्धा के मुख पर कितनी करुणा और कितनी नम्रता थी, युगों-युगों के बाद ऐसा दान मिलता है और वह आज मुझे मिला है.
वैसे यह Story से यही सीख मिलती है कि हमें अपनी किसी भी चीज पर अहंकार नहीं रखना चाहिए हमारे पास जो भी चीज है जितनी भी है उसमे खुश रहना चाहिए और किसी को अगर आप दान भी देते हो तो अपने अहंकार से मत दो अपने दिल से दो क्योंकि क्या पता आप का अहंकार ही आप को नीचे गिरा दे.
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Nice article.